• सूफी वो हैं जो अल्‍लाह को पाने के लिए धर्म की वास्‍तविकता यानि मुहब्‍बत पर ध्‍यान केन्द्रित किया उस सीधे रास्‍ते को अपनाया जो सीधे अल्‍लाह से जा मिलता है।

  • अपनी बातें अपने किरदार (व्‍यक्तित्‍व), अख्‍लाक व अमल और मोहब्‍बत से समझाई।

  • दुनिया की चाहत को अपने पास भी भटकने नहीं दिया, बल्कि दुनियादारी से बचना जरूरी समझा।

  • शरीअत के हुक्‍म की पैरवी के साथ साथ उसकी हिफाजत भी कुबूल की।

  • जाहिरी व बातिनी से बुराई, बेइमानी व धोखे को निकाल फेंका और अंदर व बाहर से एक जैसा होना उनकी निशानी बन गई है।

  • अपनी इबादत (पूजा) को जन्‍नत (स्‍वर्ग) के लालच और दोजख (नर्क) के खौफ (डर) से आजाद किया।

  • इन्‍सानों की भलाई व खिदमत की, ये नहीं देखा कि सामने इन्‍सान का रंग क्‍या है, नस्‍ल क्‍या है, कौम-मजहब क्‍या है, मुल्‍क व वतन क्‍या है?

  • हिन्‍दू हो या मुस्लिम हो या सिख हो या ईसाई, इनकी बारगाह से कोई मायूस व नामुराद नहीं लौटाया।

  • जूद व सखा (दान पुण्‍य) उनकी आदत होती है।