हज़रत मुहम्‍मद ﷺ कौन हैं? Who is Muhammad PBUH?



हज़रत मुहम्‍मद ﷺकौन हैं?

द्वादश्‍यां शुक्‍ल पक्षस्‍य, माधवे मासि माधवम्।
जातो ददृशतुः पुत्रं पितरौ हृष्‍टमानसौ।।

अर्थात – ”जिसके जन्‍म लेने से दुखी मानवता का कल्‍याण होगा, उसका जन्‍म मधुमास के शुक्‍ल पक्ष
और रबी फसल (रबीउल अव्‍वल) में चन्‍द्रमा की 12वीं तिथि को होगा”
(पुराण, अध्‍याय 2, श्‍लोक 15)

अगर आप लगन की अदभूत शक्ति का अध्‍ययन करना चाहते हैं तो हज़रत मुहम्‍मद ﷺ की जीवनी पढ़ें.
(नेपोलियन हील, थींक ग्रो एण्‍ड रिच)

“The rise of Islam began. Out of the desert came a flame which would not be extinguished–a democratic army fighting as a unit and prepared to die without wincing. Mohammed had invited the Jews and Christians to join him; for he was not building a new religion. He was calling all who believed in one God to join in a single faith.” – Thomas Surgrue

रेगिस्‍तान के अंदर से एक लौ निकली जो बुझ नहीं पायी, एक प्रजातांत्रिक सेना उभरी जो मिलकर लड़ने और बिना उफ किए मरने के लिए तैयार थी, हज़रत मुहम्‍मद ﷺ ने यहूदियों और इसाइयों को भी अपने साथ आने के लिए आमंत्रित किया क्‍योंकि वे नया धर्म नहीं बना रहे थे, वे तो सभी को एक ही आस्‍था में करना चाहते थे, उनका एक धर्म में विश्‍वास था.
(थामस स्‍यूग्रू, हेराल्‍ड ट्रिब्‍यून)

हज़रत मुहम्‍मद ﷺ को नये सिरे से पहचानने की आवश्यकता है।
(कोन्‍टन वेरजेल जोर्जियो)

पांचवी और छठी सदी में इंसानी सभ्‍यता तबाही के दहाने पर खड़ी थी, पिछले चार हजार साल में जो मानव सभ्‍यता बनी थी वो टूट रही थी, सब आपस में लड़ रहे थे, ऐसे समय में अरब में एक मनुष्‍य पैदा हुआ जिसने पूर्वी व पश्चिमी दुनिया को एकता के सूत्र में बांध दिया… वो हज़रत मुहम्‍मद ﷺ थे।
(जे.एच.डेनिसन, इमोशन्‍स एस दि बेसेसऑफसिविलाइजेशन)

“They would not even accept Mohammed’s innovation of humane warfare. When the armies of the Prophet entered Jerusalem not a single person was killed because of his faith. When the crusaders entered the city, centuries later, not a Moslem man, woman, or child was spared.” – Thomas Surgrue

हज़रत मुहम्‍मद ﷺ ने मानवीय युद्ध की माफ करने की नइ अवधारणा दी, जो इसके पहले कहीं सुनी नहीं गइ थी। उन्होने उन मक्कावासीयों को माफ कर दिया जिन लोगों ने उन्हे् सबसे ज्यादा सताया। इसके अलावा जब उनकी सेना येरूसेलम में दाखिल हुइ तो आस्‍था के नाम पर किसी को कत्‍ल नहीं किया गया, जबकि बाद में जब ईसाइ फौज येरूसेलम में दाखिल हुइ तो किसी को भी जिंदा नहीं छोड़ा गया।
(थामस स्‍यूग्रू, हेराल्‍ड ट्रिब्‍यून)

आज जो शिक्षा का स्‍थान विश्‍वविद्यालय है, वो हज़रत मुहम्‍मद ﷺ की ही देन है।
(असद बे)

अगर हज़रत मुहम्‍मद ﷺ न होते तो धर्म मठों और जंगलों में सिमटकर रह जाता।
(स्‍वामी विवेकानंद)

ग्रीक व वैदिक सभ्‍यता और हज़रत मुहम्‍मद ﷺ के विचारों में समानताएं हैं।
(महात्‍मा गांधी)

पोप, पादरी, अन्वेषक और वो सभी लोग जो अफ्रीका में गुलामी का आदेश दिया तथा इसे धर्म के मुताबिक बताया, वो सबके सब गुमनामी के अंधेरे में सो गए। इसके विपरीत हज़रत मुहम्‍मद ﷺ हैं जिन्होने इन्सानियत को रंग व नस्ल की जंजीरों से आजादी दी, उनका नाम रौशन होता जा रहा है।
(जी.हिगिन्‍स, एपोलोजी फार मोहामेट)

“Is the best religion and Muslims are the worst followers.” – George Bernard Shaw

सबसे बेहतरीन धर्म इस्‍लाम है लेकिन आज मुसलमान सबसे बुरे होते जा रहे हैं।
(बर्नाड शॉ)

हज़रत मुहम्‍मद ﷺ के विचार, अख्‍लाक और रहन सहन, इंसानियत का आश्‍चर्य है तथा हम यकीन करने पर मजबूर हैं कि उनकी शिक्षा शुद्ध और सच्‍ची है.
(लियो टालस्‍टॉय)

अराजकवादी और अय्याश अरबियों के बीच हज़रत मुहम्‍मद ﷺ ने गुलामों को भाई का और औरतों को समानता का अधिकार दिया।
(ई.‍डर्मिंघम, दि लाईफ आफ मोहामेट)

दुनिया में बहुत से धर्म आए और खत्म हो गए, सवाल यह है कि इस्लाम कब तक बाकि रहेगा? इसके जवाब के लिए हज़रत मुहम्‍मद ﷺ के व्यक्तित्व को देखा जाए, जब तक इसकी कशिश और असर बाकी रहेगा, इस्लाम बाकि रहेगा।
(जी.डब्यू्मब.लाइट्ज, रिलिजियस सिस्‍टम आफ दि वर्ल्ड)

हज़रत मुहम्‍मद ﷺ से बड़ा इंसान और इंसानियत का पुजारी, दुनिया कभी पैदा न कर सकेगी।
(वाल्टेएयर, फिलासाफी डिक्शनरी)

मुसलमानों की लड़ाइयों और बुराईयों की वजह से हज़रत मुहम्‍मद ﷺ से नफरत करना बहुत ही गलत व बदनसीबी की बात है।
(एम.एम.वाट)

हज़रत मुहम्‍मद ﷺ ने पूंजीवाद व जातिवाद का अंत करके दुनिया को प्रजातंत्र दिया।
(ई.ब्लाएडन, क्रिश्चियनिटी इस्लाम दी नेग्रो रेस)

हज़रत मुहम्‍मद ﷺ को (सिर्फ मुसलमानों के लिए नहीं बल्कि) पूरी दुनिया के लिए दयावान बनाया गया है।
(कुरआन)­

अगर हज़रत मुहम्‍मद ﷺ पूरी दुनिया के सम्राट होते तो इस दुनिया के सारे मसले हल हो चुके होते।
(लियो टालस्टालय)

‘नन्दा! इस संसार में मैं न तो प्रथम बुद्ध हूँ और न तो अन्तिम बुद्ध हूँ। इस जगत में सत्य तथा परोपकारक की शिक्षा देने के लिए अपने समय पर एक और ‘बुद्ध’ आएगा। वह पवित्र अन्तःकरण वाला, शुद्ध हृदय वाला, ज्ञान और बुद्धि से सम्पन्न तथा समस्त लोगों का नायक होगा। जिस प्रकार मैंने जगत् को अनश्वर सत्य की शिक्षा प्रदान की, उसी प्रकार वह भी जगत को सत्य की शिक्षा देगा। जगत् को वह ऐसा जीवन मार्ग दिखाएगा जो शुद्ध व पूर्ण होगा। नन्दा् उसका नाम मैत्रेय होगा।’
(गौतम बुद्ध)

लिंड्गच्‍छेदी शिखाहीनः श्‍माश्रुधारी स दूषकः।
उच्‍चालापी सर्वभक्षी भविष्‍यति जनो मम॥25॥
विना कौलं च पशवस्‍तेषां भक्ष्‍या मता मम।
मुसलेनैव संस्‍कारः कुशैरिव भविष्‍यति॥26॥
तस्‍मान्‍मुसलवन्‍तो हि जातयो धर्मदूषकाः।
इति पैशाचधर्मश्‍च भविष्‍यति मया कृतः॥27॥
(पूराण- भ.पु.पर्व3,खण्‍ड3,अ.1,श्‍लोक25,26,27)

अर्थात, ”हमारे लोगों का खतना होगा, वे शिखाहीन होंगे, वे दाढ़ी रखेंगे, उंचे स्‍वर में आलाप करेंगे (आजान देंगे) शाकाहारी मांसाहारी (दोनो) होंगे, किन्‍तु उनके लिए बिना कौल (बिना मंत्र से पवित्र किये यानि हलाल किए) कोई पशु भक्ष्‍य (खाने) योग्‍य नहीं होगा। इस प्रकार हमारे मत के अनुसार हमारे अनुयायियों का मुसलैनेव संस्‍कार होगा। उन्‍हीं से मुसलवन्‍त (यानि निष्‍ठावानों का) धर्म फैलेगा और मेरे कहने से पैशाच धर्म का अंत होगा।

यहां न पक्ष्‍पात कछु राखहुं। वेद, पुराण, संत मत भाखहुं।।
संवत विक्रम दोऊ अनङ्ग। महाकोक नस चतुर्पतङ्ग।।
राजनीति भव प्रीति दिखवै। आपन मत सकमा समझावै।।
सुरन चतुसुदर सतचारी। तिनको वंश भयो अति भारी।।
तब तक सुन्‍दर मद्दिकोया। बिना महामद पार न होया।।
तबसे मानहु जन्‍तु भिखारी। समरथ ना एहि व्रतधारी।।
हर सुन्‍दर निर्माण न होई। तुलसी वचन सत्‍य सच होई।।
(संग्राम पुराण, स्‍कन्‍द, 12, कांड 6 पद्यानुवाद, गोस्‍वामी तुलसीदास)

अर्थात, ”(तुलसीदास जी कहते हैं) मैंने यहां किसी प्रकार का पक्षपात न करते हुए संतो, वेदों और पुराणों के मत को कहा है। सातवीं विक्रमी सदी में चारों सूर्यों के प्रकाश के साथ वह पैदा होगा। राज करने में जैसी परिस्थितियां हों, प्रेम से या सख्‍ती से वह अपना मत सभी को समझा सकेगा। उसके साथ चार देवता (चार खलिफा) होंगे, जिनकी सहायता से उसके अनुयायियों की संख्‍या काफी हो जाएगी। जब तक सुन्‍दर वाणी (कुरआन) धरती पर रहेगी (उसके) और महामद (हज़रत मुहम्‍मद ﷺ) के बिना मुक्ति नहीं मिलेगी। इन्‍सान, भिखारी, कीड़े-मकोड़े और जानवर (सभी) इस व्रतधारी (रोजे रखनेवाला) का नाम लेते ही ईश्‍वर के भक्‍त हो जाएंगे। फिर कोई उसकी तरह का पैदा न होगा, तुलसीदास जी ऐसा कहते हैं कि उनका वचन सत्य सिद्ध होगा।”

उष्‍ट्रा यस्‍य प्रवाहिणो वधूमन्‍तों द्विर्दश।
वर्ष्‍मा रथस्‍य नि जिहीडते दिव ईषमाण उपस्‍पृशः।।
(अथर्ववेद कुन्‍ताप सूक्‍त 20/127/2)

अर्थात, ”जिसकी सवारी में दो खूबसूरत उंटनियां हैं। या जो अपनी बारह पत्नियों समेत उंटों पर सवारी करता है, उसकी मान प्रतिष्‍ठा की उंचाई तेज गति से आसमान को छूकर उतरती है।”

‘पहिला नाम खुदा का दूजा नाम रसूल,
तीजा कलमा पढ़ि नानका दरगाह परे कबूल।
दिहटा नूर मुहम्मदी दिहटा नबी रसूल,
नानक कुदरत देखकर सुदी गयो सब भूल।‘
(गुरू नानक)

वह (हज़रत मुहम्‍मद ﷺ) पवित्र आत्‍मा और आज से बपतिस्‍मा देगा।
(बाइबिल, सेण्‍ट मैथ्‍यू 3/11)

वह अन्‍य जाति में आएगा। इसलिए मैं तुम्‍हें कहता हूं कि परमेश्‍वर का राज्‍य तुमसे ले लिया जाएगा और ऐसी जाति को, जो इसका फल लाए, दिया जाएगा।
(बाइबिल, मैथ्‍यू 21,43)

“It was the first religion that preached and practiced democracy” – Sarojini Naidu
ये पहला धर्म है जिसने लोकतंत्र की शिक्षा दी और उसे एक व्‍यवहारिक रूप दिया।
(सरोजनी नायडू)

कहा जाता है कि यूरोप वाले दक्षिणी अफ्रीका में इस्‍लाम के प्रसार से भयभीत हैं, उस इस्‍लाम से, जिसने स्‍पेन को सभ्‍य बनाया, उस इस्‍लाम से जिसने मराकश तक पहुंचाई और संसार को भाई-चारे की इन्‍जील पढ़ाई। दक्षिण अफ्रीका के यूरोपिय इस्‍लाम के फैलाव से बस इसलिए भयभीत हैं कि उसके अनुयायी गोरों के साथ कहीं समानता की मांग न कर बैठें।
(महात्‍मा गांधी)

(Regarding Muhammad) “… a mass of detail in the early sources shows that he was an honest and upright man who had gained the respect and loyalty of others who were likewise honest and upright men.” – Encyclopedia Britannica

समस्‍त पैगम्‍बरों और धार्मिक क्षेत्र के महान व्‍यक्तित्‍वों में हज़रत मुहम्‍मद ﷺ सब से ज्‍यादा सफल हुए हैं।
(ब्रिटेनिका इन्‍साइक्‍लोपिडिया)

एक नेता के लिए आंदोलनकारी व्‍यक्ति होना बहुत जरूरी है, इसके विपरीत सिद्धांतशास्‍त्री कभी कभार ही नेता बनते हैं। इस धरती पर एक ही व्‍यक्ति है जो सिद्धांतशास्‍त्री भी है, संयोजक भी है और नेता भी, यह दुर्लभ है। वो महान व्‍यक्ति हज़रत मुहम्‍मद ﷺ हैं।
(मेन कैम्‍प, हिटलर)

वे (हज़रत मुहम्‍मद ﷺ) बिना ठाठ-बाठ के सीजर (बादशाह) थे और बिना आडम्‍बर के पोप (धर्मगुरू) थे। उन्‍होने दैवी अधिकार से राज किया।
(बास वर्थ स्मि‍थ)

हां हम में से वे सब जो नैतिक व सदाचारी जीवन व्‍यतीत करते हैं वे सभी इस्‍लाम में ही जीवन व्‍यतीत कर रहे हैं। यह तो अन्‍ततः वह सर्वोच्‍च ज्ञान एवं प्रज्ञा है जो आकाश से इस धरती पर उतारी गयी है।
(कारलायल)

हमारा पक्का विश्वास है कि व्यावहारिक इस्लाम की मदद लिए बिना वेदांती सिद्धांत—चाहे वे कितने ही उत्तम और अद्भुत हों—विशाल मानव-जाति के लिए मूल्यहीन (Valueless) हैं…।”
—टीचिंग्स ऑफ विवेकानंद, पृष्ठ-214, 215, 217, 218) अद्वैत आश्रम, कोलकाता-2004

हज़रत हज़रत मुहम्‍मद ﷺकहते हैं कि…
अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं है, वह एक ही है, कोई उसका साझी नहीं है।
ईश्वर एक है और सारे इन्सान बराबर हैं।

सारे मनुष्य आदम की संतान हैं और आदम मिट्टी से बनाए गए।
माँ के क़दमों के नीचे जन्नत है।

जिस व्यक्ति के तीन (या तीन से कम भी) बेटियां हों, वह उनकी हत्या न करें, बल्कि उन्हें सप्रेम व स्नेहपूर्वक पाले-पोसे, उन्हें (नेकी, शालीनता, सदाचरण व ईशपरायणता की) उत्तम शिक्षा-दीक्षा दे, बेटों को उन पर प्रमुखता व वरीयता न दे, और अच्छा-सा (नेक) रिश्ता ढूंढ़कर उनका घर बसा दे, जो ऐसा करेगा वह पारलौकिक जीवन में स्वर्ग में मेरे साथ रहेगा।


अल्‍लाह, तुम्‍हारी सूरत या आमाल नहीं देखता बल्कि वो तो तुम्‍हारा दिल और नियत देखता है।

धर्म के मामले में कोई जोर जबरदस्‍ती नहीं हो सकती।

औरतें मर्दों का दूसरा हिस्‍सा है, औरतों के अधिकार का आदर होना चाहिए, इसका ध्‍यान रहे कि आरतें अपने निश्चित अधिकार प्राप्‍त कर पा रहीं या नहीं।

अनाथों के सिर पर हाथ फेरो और भूखों को भोजन खिलाओ। दिल नरम हो जायेगा।

रोज़ा तुम्हारे संपूर्ण शरीर का है, तुम्हारे हृदय का रोज़ा यह है कि उसके अंदर कोई ग़लत भावना न हो। मस्तिष्क से ग़लत न सोचे, आंख गलत चीज़ें न देखे, हाथ से कोई ग़लत काम न करें, ज़बान से कोई ग़लत बात न कहे, पांव किसी गलत जगह एवं ग़लत काम के लिए न उठे। अगर शरीर के किसी अंग का रोज़ा टूटता है तो तुम्हारा रोज़ा पूर्ण नहीं होगा।

कोई मनुष्य उस वक़्त तक मोमिन (सच्चा मुस्लिम) नहीं हो सकता जब तक वह अपने भाई-बन्दों के लिए भी वही न चाहे जो वह अपने लिए चाहता है।
तुममें से सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति वह है जो अपनी पत्नी से अच्छा सुलूक करे।
पत्नी अपने पति के स्थान पर समस्त अधिकारों की मालिक है।

सबसे बड़ा गुनाह अल्लाह के साथ शिर्क और किसी इन्सानी जान को क़त्ल करना है।


पैगम्बर हजरत मुहम्मद साहब (ﷺ) की शिक्षाओं की एक झलक ProphetofCompassion


1. समस्त संसार को बनाने वाला एक ही मालिक हैं। वह निहायत मेहरबान और रहम करने वाला है। उसी की ईबादत करो और उसी का हुक्म मानो।


2. अल्लाह ने इन्सान पर अनगिनत उपकार किए हैं। धरती और आकाश की सारी शक्तियॉ इन्सानों की सेवा मे लगा दी हैं। वही धरती और आकाश का मालिक हैं, वही तुम्हारा पालनहार हैं।


3. अल्लाह (यानि अपने सच्चे मालिक ) को छोड़कर अन्य की पूजा करना सबसे बड़ा जुल्म और अत्याचार है।


4. अल्लाह की नाफरमानी करके तुम उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकते। फरमाबरदार बनकर रहो, इसमें तुम्हारा अपना भला है।


5. अल्लाह की याद से रूह को सकून मिलता हैं। उसकी इबादत से मन का मैल दूर होता है।


6. अल्लाह की निशानियों ( दिन, रात, धरती, आकाश, पेड़-पौधे, जीव-जन्तु आदि की बनावट ) पर विचार करो। इस से अल्लाह पर ईमान मजबूत होगा और भटकने से बच जाओगे।


7. मैं ( पैगम्बर मुहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) अल्लाह की ओर से संसार का मार्ग दर्शक नियुक्त किया गया हूॅ। मार्ग दर्शन का कोई बदला तुमसे नही चाहता। मेरी बातें सुनों और मेरी आज्ञा का पालन करो।


8. मै कोई निराला और अजनबी पैगम्बर नही हूॅं। मुझसे पहले संसार मे मार्ग दर्शन के लिए बहुत-से रसूल आ चुके हैं, अपने धर्म-ग्रन्थों में देख लो या किसी ज्ञानी व्यक्ति से मालूम कर लो। मैं पहले के पैगम्बर की शिक्षा को पुन: स्थापित करने और कपटाचारियों के बन्धन से मानव को मुक्त कराने आया हू।


9. मैं इसलिए भेजा गया हू कि नैतिकता और उत्तम आचार को अंतिम शिखर तक पहुॅचा दू।
मैं लोगो की कमर पकड़-पकड़कर आग में गिरने से बचा रहा हू, किन्तु लोग हैं कि आग ही की ओर लपक रहे हैं।


10. मैं दुनियावालों के लिए रहमत बनाकर भेजा गया हूॅ। तुम लोगो के लिए आसानियॉ पैदा करो; मुसीबते न पैदा करो। मॉ-बाप की सेवा करो। उनके सामने ऊॅची आवाज से न बोलो। उन्होने तुम पर बड़ा उपकार किया है, अत: तुम उनके आज्ञाकारी बनकर रहों।


11. मॉ-बाप यदि अन्याय का आदेश दे तो न मानों, बाकी बातों में उनकी आज्ञा का पालन करो।


12. सारे मानव एक मालिक(अल्लाह) के पैदा किए हुए है, एक मॉ-बाप(आदम-हव्वा) की संतान हैं। उनके बीच रंग-नस्ल जाति, भाषा, क्षेत्रीयता आदि का भेद भाव घोर अन्याय है। सारे लोग आदम की सन्तान है, उनसे प्यार करो घृणा न करो। उन्हे आशावान बनाओं निराश मत करो।


13. मानव में श्रेष्ठ वह हैं जो दूसरों का हमदर्द, पवित्र आचरण वाला और अपने रब का आज्ञाकारी हैं।


14. तुम धरती वालों पर दया करो, आकाशवाला ( अल्लाह ) तुम पर दया करेगा।


15. वह व्यक्ति सब से अच्छा हैं जो अपने घरवालों और पड़ोसियों के लिए अच्छा हैं।


16. औरतों, गुलामों और यतीमों ( अनाथों ) पर विशेष रूप से दया करो।


17. जो अपने बेटे और बेटियो के बीच भेदभाव न करे और बेटियों का ठीक से पालन-पोषण करे, वह स्वर्ग में जाएगा।


18. जो बड़ो का आदर और छोटो से प्रेम न करे वह हम में से नहीं।


19. तुम ￰दुनयावी जिन्दगी मे मस्त होकर भूल मत जाओ, तुम सब को अपने किए हुए कर्मो का हिसाब अपने रब को देना हैं। आखिरत ( परलोक ) की सफलता ही वास्तविक सफलता हैं।


20. आखिरत ( परलोक ) की यातना बड़ी कठोर हैं। वहॉ कुल-वंश, सगे-सम्बन्धी, धन-दौलत और किसी की सिफारिश कुछ काम आने वाली नहीं। अल्लाह के हुक्म का पालन और उत्तम आचरण ही (उस की यातना से) बचने का एक मात्र साधन हैं। अपने को और अपने घर वालों को नरक की अग्नि से बचाओं।


21. अल्लाह के हुक्म के मुताबिक खर्च करके स्वंय को नरक की अग्नि से बचाओं। तुम्हारे माल में तुम्हारे सम्बन्धियों, गरीबो, अनाथो का भी हक हैं। उन के हक अदा करो। दूसरो का धन अवैध रूप से न खाओं। तिजारत या समझौते के द्वारा वैध रूप से धन प्राप्त करो। चीजों मे मिलावट न करो, नाप-तौल मे कमी न करो। व्यापार में धोखा न दो। जो धोखा देता हैं हम में से नही।


22. बाजार मे भाव बढ़ाने के लिए ( गल्ला आदि ) चीजों को रोककर ( जखीरा कर के ) मत रखों। ऐसा करने वाला घोर यातना का अधिकारी है।


23. पैसे को गिन-गिनकर जमा न करो और न फिजूलखर्ची करो, मध्यम मार्ग को अपनाओं।


24. दूसरों के अपराध क्षमा कर दिया करो। दूसरों के ऐब का प्रचार न करो उसे छिपाओं, तुम्हारा रब तुम्हारे ऐबो पर परदा डाल दैगा। झूठ, चुगलखोरी, झूटे आरोप ( बोहतान ) से बचो। लोगो को बुरे नाम से न पुकारो।


25. अश्लीलता और निर्लज्जता के करीब भी न जाओ, चाहे वह खुली हो या छिपी।


26. दिखावे का काम न करो। दान छिपाकर दो। उपकार करके एहसान मत जताओ।


27. रास्ते से कष्टदायक चीजों ( कॉटे, पत्थर आदि ) को हटा दिया करो।


28. धरती पर नर्म चाल चलो, गर्व और घमण्ड न करो। जब बोलो अच्छी बात बोलो अन्यथा चुप रहो। अपने वचन और प्रतिज्ञा को पूरा करो।


29. सत्य और न्याय की गवाही दो, चाहे तुम्हारी अपनी या अपने परिवार-जनों की ही हानि क्यो न हो। अन्याय के विरूद्ध संघर्ष करने वाला अल्लाह का प्यारा होता है।


30. किसी बलवान को पछाड़ देना असल बहादुरी नही, बहादुरी यह है कि आदमी गुस्से पर काबू पाए।


31. मजबूर का पसीना सूखने से पहले उसकी मजदूरी अदा करो।


32. किसी सेवक से उसकी शक्ति से अधिक काम न लो, उस के आराम का ख्याल रखो। जो खुद खाओं उसे भी खिलाओं और जो खुद पहनो उसे भी पहनाओं। जानवरों पर दया करो, उनकी शक्ति से अधिक उनसे काम न लो।


33. किसी वस्तु का आवश्यकता से अधिक प्रयोग न करो। पानी का दुरूपयोग न करो, चाहे तुम नदी के किनारे ही क्यो न हो।


34. अपने शरीर, वस्त्र और घर को पाक-साफ रखों। जब सोकर उठो तो सबसे पहले अपने दोनो हाथों को धो लो। तुम्हे पता नही कि नींद में हाथ कहॉ-कहॉ गए हैं।


35. युद्ध मे औरतो, बच्चो, बीमारों और निहत्थो पर हाथ न उठाओं। फल वाले पेड़ो को न काटो। युद्ध के बन्दियों के साथ अच्छा व्यवहार करो, उन्हें यातनाएं न दो।


36. जो कोई बुराई को देखे, तो अपनी ताकत के मुताबिक उसे रोकने की कोशिश करे, यदि रोकने की क्षमता ना हो तो दिल से उस को बुरा समझो।


37. सारे कर्मो का आधार नीयत ( इरादा ) हैं। गलत इरादे के साथ किए गए अच्छे कर्मो का भी कोई फल अल्लाह के यहॉ नही मिलेगा।



Subscribe to receive free email updates:

0 Response to "हज़रत मुहम्‍मद ﷺ कौन हैं? Who is Muhammad PBUH?"

Post a Comment