या साहेबल जमाल व या सय्यदिल क़मरमिउंवजहेकल मुनीरो लक़द नव्वरूल क़मरलायुमकेनश शनाओ कमा काना हक़्क़हूबाद अज़ ख़ुदा बुजूर्ग तुई कि़स्सा मुख़्तसर
ऐ साहेबे जमाल! और आदमियों के सरदार!आप ही के रूए मुबारक के अनवार से चांद रौशन है।
आपकी सारी तारीफ़ें बयान करना नामुमकिन है।बस कि़स्सा मुख़्तसर ये है कि खुदा के बादआपका मरतबा सबसे बुलंद व आला है।
हदीस शरीफ़ है.
‘‘मैं अल्लाह के नूर से और मोमीन मेरे नूर से।’’
और दूसरी रवायत है कि
‘‘मैं अल्लाह से हूं और मोमीन मुझसे है।’’
सबसे पहले खुदा ने हुज़ूरﷺ का नूर पैदा किया और फिर उससे तमाम मख़्लूक को पैदा फ़रमाया। सब हुज़ूरﷺ से ही पैदा हुआ, लेकिन सबको हुज़ूरﷺ ने अपना नहीं कहा।
कहा तो सिर्फ उन लोगों के बारे में जो हुज़ूरﷺ से जुड़ गए,
उनकी फ़रमाबरदारी किए, उनके नक्शेकदम पर चले। ऐसे लोगों के बारे में हुज़ूरﷺ फ़रमा रहे हैं कि वो मुझसे हैं। और फिर जिनसे हुज़ूरﷺ राज़ी हो गए, उनसे रब राज़ी हो गया।
हदीस कुदसी है.
जिसने मुझे देखा, तहक़ीक़ उसने खुदा को देखा।
हुज़ूरﷺ नूरूल्लाह हैं।
खुदा से उनकी निसबत इस तरह ज़ाहिर होती है।
ऐ महबूब! तुमने मिट्टी नहीं फेंकी, बल्कि अल्लाह ने फेंकी। (कुरान 8:17)
यानी हुज़ूरﷺ का फेंकना भी अल्लाह का फेंकना है।
हुज़ूरﷺ का जल्वानुमा होना कितनी अहमियत रखता है,
इस बात से ज़ाहिर होती है। हदीस कुदसी में है.
‘‘(ऐ मुहम्मदﷺ ) अगर आपको पैदा नहीं करता तो अपनी खुदाई भी ज़ाहिर नहीं करता।’’
यानी आपकी वजह से ही सबकुछ पैदा हुआ और आपकी खातिर ही दोजहां को पैदा किया गया।
इसके अलावा.
(ऐ महबूब) बेशक जो लोग आपसे बैअत करते हैं, वो अल्लाह ही से बैअत करते हैं।
उनके हाथ पर (आपके हाथ की सूरत में) अल्लाह ही का हाथ है। (कुरान 48:10)
यानी हुज़ूरﷺ का हाथ अल्लाह का हाथ है।
ग़ालिब सनाए ख़्वाजाएब यज़दां गुज़ाश्तेमकान ज़ाते पाकमरतबए दाने मुहम्मदﷺ अस्त
ऐ ग़ालिब, हम ख़्वाजाए आलम (हज़रत मुहम्मदﷺ ) की तारीफ़ व तौसीफ़, अल्लाह की ज़ाते अक़दस पर छोड़ते हैं। क्योंकि सिर्फ़ खुदा ही हुज़ूरﷺ के मुक़ाम व मरतबे को जानता है।


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