महफिले सिमा

हजरत दाता गंज बख्श रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं-

सूफीयों में से हर एक का महफिले सिमा के मामले में एक खास मकाम व मरतबा है जिसके जरिए महफिले समा से फुयूज़ो बरकात हासिल करते हैं। जैसा कि

• महफिले सिमा, तौबा करने वाले के लिए नदामत है,
• महफिले सिमा, दीदार की ख्वाफहिशमंद के लिए सबबे दीदार है,
• महफिले सिमा, यकीन करने वाले के लिए ता‍कीद है,
• महफिले सिमा, मुरीद के लिए तहकीक का जरीआ है,
• महफिले सिमा, मोहिब्ब के लिए तरके दुनिया का बाएस है,
• महफिले सिमा, फकीर को सिर्फ अल्लाह से लौ लगाती है।

 

दरअस्लफ महफिले सिमा सूरज की तरह है जो तमाम चीजों पर रौ‍शनी डालता है मगर हर चीज अपनी अपनी समझ और काबिलियत के मुताबिक इससे फायदा लेती है।

 

सूरज किसी को जला देता है और किसी को जिला (जिन्दा ) कर देता है। किसी को नवाज़ता है तो किसी को भस्म कर देता है।…